मुझे नहीं पता, मैं कैसा लिखता हूँ? अच्छा लिखता हूँ या बुरा लिखता हूँ! खरा लिखता हूँ या खोटा लिखता हूँ! मुझे नहीं पता, मैं कैसा लिखता हूँ? मगर जो भी लिखता हूँ!! मगर जो भी लिखता हूँ!! हक़ीक़ते जिंदगी लिखता हूँ!!! मुझे नहीं पता, मैं कैसा लिखता हूँ?
मंगलवार, 19 अक्टूबर 2021
रविवार, 17 अक्टूबर 2021
हक़ीक़ते-ए-जिंदगी
कोई बात नहीं
अग़र खुश न रह सको!
कवि कहता है इतना
मग़र चिंता न किया करो!
हर बारिस के बाद
धूप निकलती है!
हर रात के बाद
दिन निकलता है!
बस इस सच्चाई को
स्वीकार कर लिया करो!
कोई बात नहीं!!
अग़र कुछ न कर सको!!
लम्हा बदलता है हरपल
बस इंतज़ार कर लिया करो!!!!!
हँसी-ए-रहगुज़र
अंदर से हों खुश यदि
तो कलियाँ खिलती हैं!
धूप, बारिस, हवा, पानी
सब एहसास हैं जिंदगी के!
खो दे इन्हें जो, तो
जिंदगी टूटती है!
जरूरत यहाँ किसी को
किसी की नहीं है!
यह दुनियाँ का मेला है
अकेले ही घूमना है!
ग़म तो हैं फैले आज
हर किसी के जीवन में
बिन माँगे मिल जाएंगे!
पर मिल जाये अपना सा
अग़र कोई रहगुज़र
तो कुछ पल जिंदगी के
हँस के बाँट लेना है!!!
शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2021
अर्पित-ए-तसव्वुर
मैं कहता वही हूँ
जो दिल-ए-बाग़ में
कुछ हलचल कर दे!
कर ले कोई तसव्वुर फिर
चाहे तो फिर मुँह मोड़ दे!!
सोमवार, 11 अक्टूबर 2021
हँसी-ए-मल्लिका
हँसना, रोने से बेहतर है
दिल के अरमानों को
कागज़ पे उतारना बेहतर है
क्या रखा है चिलमने खामोशी में
आओ करलें कुछ बातें
मन की मन से गुफ़्तुगू बेहतर है!!
मंगलवार, 21 सितंबर 2021
आदत-ए-सदमा
सदमें में न रहा करो
आदत ही तो है!
बदल लिया करो!!
लोगों को क्या पता
मन की गहराई तुम्हारी!
कम बोलकर भी
सब कुछ बोल जाया करो!!
यह तो है शुरुआत
जिंदगी की!
बहुत कुछ घटेगा अभी
मग़र तुम हर पल!
मुस्कुराया करो!!
मुड़कर जो देखो अग़र
पीछे कभी!
तो सीख लेकर फिर से
आगे बढ़ जाया करो!!
मंगलवार, 7 सितंबर 2021
ठहराव-ए-जिंदगी
भावभीनी! कलम चली
आज युवाओं की मौत पर!
दे गए जो सीख वो!
लिख दिए मैंने!
अश्रु छुपाकर!
भाग दौड़ की,
जिंदगी में,
थोड़ा सा,
ठहराव चाहिए,
युवा हो रहे,
गुमराह क्यों?
ढूँढना इसका,
जवाब चाहिए,
भाग दौड़ की,
जिंदगी में,
थोड़ा सा,
ठहराव चाहिए,
सफलता के,
मुक़ाम पर,
असफलता का,
तनाव क्यों?
भीतर से,
परेशान हैं,
तो दिखावटी,
मुस्कान क्यों?
सच्चे जज्बातों को,
करना बँया चाहिए,
भाग दौड़ की,
जिंदगी में,
थोड़ा सा,
ठहराव चाहिए,
कितना आगे,
भागोगे?
कितना ऊपर,
जाओगे?
क्षण भंगुर है,
सब कुछ,
इक दिन,
जमीं पर ही आओगे,
इसलिये चले थे,
कहाँ से?
कभी उन राहों को,
मुड़कर भी,
देख लेना चाहिए,
भाग दौड़ की,
जिंदगी में,
थोड़ा सा,
ठहराव चाहिए,
भौतिकता वादी सुखों को,
जो दे दी अहमियत ज़्यादा,
उसका असर,
दिखाई देता है,
सब कुछ पाकर भी,
जब लगता है,
कुछ पाया नहीं,
ऐसी शिक्षा को,
संस्कारों का आधार चाहिए,
भाग दौड़ की,
जिंदगी में,
थोड़ा सा,
ठहराव चाहिए,
छोड़ विदेशी सभ्यता,
छोड़ अपनी कामुकता,
आओ!
लौटें फिर,
भारत की ओर,
भूत, वर्तमान और भविष्य,
तीनों का जहाँ मेल था,
बच्चे, जवान और बूढ़े,
एक दूजे का साथ था,
कुनबा था छोटा अपना,
पर समस्याओं का,
समाधान था,
अनुभव की कमी नहीं,
वो बूढ़ा अपने साथ था,
मर चुकी,
उस परम्परा को,
जीवन फिर से,
आज चाहिए,
भाग दौड़ की,
जिंदगी में,
थोड़ा सा,
ठहराव चाहिए,
भाग दौड़ की,
जिंदगी में,
थोड़ा सा,
ठहराव चाहिए!!
रविवार, 5 सितंबर 2021
ख़्वाब-ए-तसव्वुर
ख़्वाबों को भी थकने दो!
कुछ पल उन्हें भी!
तन्हाईयों में रहने दो!
कब तक थोपोगे!
अपनी ख़्वाहिशें इन पर!
कुछ वक्त इन्हें भी!
तसव्वुर से जीने दो!!
गुरुवार, 2 सितंबर 2021
अल्फ़ाज़-ए-रहगुजर
आँखों में बसा के
यादों से जमा दिया!
सच में तुमने तो रुला दिया!!
घायल कोई अज़नबी ही सही
ज़ख्म हो पराया ही सही!
मग़र दर्द ने वही सिला दिया!!
कोई गिला नहीं
अजी! शिक़वा भी नहीं!
जो तुमने मेरे अल्फ़ाज़
किसी और को सुना दिया!!
सोमवार, 30 अगस्त 2021
Love-आजकल
देख के हुआ आकर्षण
आकर्षण से हुआ प्यार!!
प्यार से हुआ इक़रार
इक़रार हुआ मिलन-ए-सवार!!
थोड़ी सी गुफ़्तुगू
फिर हुई तक़रार!!
नज़रें हटी, नज़रें फेरी
दिल टूटा बिन आवाज यार!!
भटका थोड़ा इधर-उधर
जुड़ा कहीं और फिर बिन सार!!
यह फ़लसफ़ा-ए-हक़ीक़त है
आजकल दिखता है बार-बार!!
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देख के हुआ आकर्षण आकर्षण से हुआ प्यार!! प्यार से हुआ इक़रार इक़रार हुआ मिलन-ए-सवार!! थोड़ी सी गुफ़्तुगू फिर हुई तक़रार!! नज़रें हटी, नज़रें फेरी ...
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मजखाली के झोड़े धूणी (मंदिर) में.....