"एहसास-ए-क़लम"
मुझे नहीं पता, मैं कैसा लिखता हूँ? अच्छा लिखता हूँ या बुरा लिखता हूँ! खरा लिखता हूँ या खोटा लिखता हूँ! मुझे नहीं पता, मैं कैसा लिखता हूँ? मगर जो भी लिखता हूँ!! मगर जो भी लिखता हूँ!! हक़ीक़ते जिंदगी लिखता हूँ!!! मुझे नहीं पता, मैं कैसा लिखता हूँ?
रविवार, 23 फ़रवरी 2025
शनिवार, 8 फ़रवरी 2025
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आप की अनोखी बात है साथ नहीं पर साँस है!! संग जिए जो पल आपके हर लम्हां मुझे याद है!! बातें वो पुरानी जो कही आपने आज भी इक एहसास है!! दिल में ...
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पहाड़ की छाया Pahad Ki Chhaya
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दुवाओं में किसी को मांगा न करो!! हो के नादाँ निशाना साधा न करो!! यह दुनियाँ बड़ी सौदागर है जनाब!! तौल-मौल के रिश्ते निभाती है!! इसलिए तराजू...