शुक्रवार, 13 अगस्त 2021

ऐब-ए-दर्पण

जो कुछ नहीं करता वह दूसरों की कमियाँ ढूँढ़ता है
दूसरा भी इंसान है भगवान नहीं 
न जाने क्यों ? नहीं समझता है!!

हर कोई चाहता है बेहतर से बेहतर करना
मग़र कभी कर नहीं पाता
एक को खुश करो तो दूजा रूठ जाता है
जो कुछ नहीं करता वह दूसरों की कमियाँ ढूँढ़ता है!!

कभी उसकी जगह पर खुद को रख के तो देखो
और फिर उसके काम पर 
अपनी एक योजना बना के देखो
मुश्किलों का, चुनौतियों का तभी तो एहसास होता है
जो कुछ नहीं करता वह दूसरों की कमियाँ ढूँढ़ता है!!

क्योंकि ऐसा करना था वैसा करना था
कहना बड़ा आसान होता है
अध-पका भोजन और अधूरा ज्ञान 
दोनों से होता है नुकसान यह भी पता चल जाता है
जो कुछ नहीं करता वह दूसरों की कमियाँ ढूँढ़ता है!!

किये गए कामों में गलतियाँ ढूढ़ना आसान होता है
और गलतियाँ रहित काम करना 
बहुत ही मुश्किल होता है
जो कुछ नहीं करता वह दूसरों की कमियाँ ढूँढ़ता है!!
दूसरा भी इंसान है भगवान नहीं
न जाने क्यों ? नहीं समझता है!!

गुरुवार, 12 अगस्त 2021

हिसाब-ए-प्रकृति

मौसम का फ़साना है!
सर्दी गर्मी संग!
बारिस की बूंदों का!
तराना है!!

कहीं बादलों का फटना!
कहीं पर्वतों का गिरना है!

सरक रही है जमीं कहीं!
कहीं आंसू-ए-नीर बहना है!

यह सब देख जब!
उठती सिहरन!
तो तसव्वुर-ए-ख़याल 
का आना है!!

शायद अब समझेंगे!
हम लोग सभी!
कि प्रकृति को अब!
और नहीं छेड़ना है!!

एहसास-ए-शुरुआत नई

आँसुओं को!

समेट लो!

कुछ इस तरह!!

कि पलकों!

पर ही सूख जाएं!!

चलो खुशियों को!

लपेट कर!

फिर इक नई!

शुरुआत हो जाये!!

बुधवार, 11 अगस्त 2021

रूह से रूह तक

अपनी रूह को किसी का 
गुलाम मत बनने दो!!

दिल है अपना
इसे अपना ही रहने दो!!

भूली बिसरी यादों में
यूँ जिंदगी न बिताओ!!

खुला है आसमान
खुद को उड़ने दो!!

सोमवार, 9 अगस्त 2021

दर्पण-ए-हक़ीक़त

दुवाओं में किसी को
मांगा न करो!!

हो के नादाँ निशाना
साधा न करो!!

यह दुनियाँ बड़ी
सौदागर है जनाब!!

तौल-मौल के 
रिश्ते निभाती है!!

इसलिए तराजू के
दोनों पलड़ों को!
खुद ही बराबर करो!!

शनिवार, 7 अगस्त 2021

मोड़-ए-जिंदगी

जिंदगी है हमारी
हम मुड़ जाएँ 
चाहे जिधर से!!

वक़्त तो गुजर रहा है
अपनी ही घड़ी से
हम ही हैं जो दौड़ रहे
बे-वक़्त इधर-उधर से!!

सुनापन है नहीं
न दिया है जिंदगी ने
यह तो हमने है चुना
जीना ख़ामोशी से!!

कश्मकश में हैं फँसे
क्योंकि ख़्वाहिशें हैं पाली
वो जो हैं उलझन भरी
पूरी न हों तो 
घिर जाते हैं तन्हाईयों से!!

कोशिश करके जो मुस्कुराएँ
तो लगती है बनावट सी
अंदर से हो दिल खुश
तो दुःख आ सकता 
नहीं कहीं से!!

जिंदगी है हमारी
हम मुड़ जाएँ 
चाहे जिधर से!!

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विश्वास-ए-रूबरू

किसी के नहीं पहले
क़ाबिल खुद के बनो!!

किसी को नहीं पहले
खुद को खुश करो!!

किसी को खुद में नहीं
पहले खुद को खुद में
शामिल करो!!

कर लिया अग़र तो
छट जाएंगे यक़ीनन
हताशा के बादल सभी!

मिल जाएगी मंज़िल
हो जाएंगी ख्वाहिशें पूरी!!

शुक्रवार, 6 अगस्त 2021

उलझन-ए-तसव्वुर

जब दिल की सोच को!
दिमाग से परखने लग जाते हैं!
तो उलझ जाते हैं!!

फिर अपने बेगाने!
कभी बेगाने अपने हो जाते हैं!!

अच्छा तो यह होता कि हम!
दिल की बात दिल में दबा लेते!!

छोटी छोटी गलतियों को कर किनारा!
मन से मन की बातें करते!!

और गुथ जाते कुछ इस तरह से!
जैसे साँसे धड़कनों में गुथ जाते हैं!!

जब दिल की सोच को!
दिमाग से परखने लग जाते हैं!
तो उलझ जाते हैं!!

गुरुवार, 5 अगस्त 2021

ग़ज़ब-ए-दुनियाँ

मैंने एक भूखे को रोटी दी!

उसने मुझे दिल से दुवाएँ दी!

ले गया एक चित्रकार,सचित्र हमें!

फिर हमारे इस लेन-देन की!

दुनियाँ ने लाखों में कीमत दी!!

बुधवार, 4 अगस्त 2021

और बताओ क्या चल रहा है?

और बताओ क्या चल रहा है?
धर्म के नाम पर
लोग मर रहे हैं
मार रहे हैं
पैसे और रुतबे का
खेल चल रहा है
और बताओ क्या चल रहा है?
हकीकत का पता नहीं
सुनी सुनाई बातों पर
विश्वास चल रहा है
तकनीक हो गई 
इतनी विकसित कि
कुछ का कुछ बना के
परोसा व दिखाया जा रहा है
और बताओ क्या चल रहा है?
ठेले वाले से 
एक एक रुपये का
हिसाब चल रहा है
और स्टार होटलों में
टिप दिया जा रहा है
मंगाई बढ़ने की 
हाई तौबा मच रखी है
और फिल्म देखते देखते
बीस रुपये का पॉपकॉर्न 
सौ रुपये में खाया जा रहा है
किसानों के लिए तो बस 
अफ़सोस जताया जा रहा है
और बताओ क्या चल रहा है?
अपनों को छोड़कर 
हर एक शक़्स 
बेईमान दिख रहा है
अपनी बुद्धि व विवेक को
लगा रखा है घास चरने
और दूसरों के विचारों पर
घमासान चल रहा है
और बताओ क्या चल रहा है?
सफाई की तुलना 
विदेशों से चल रही है
जब बैठे हों अपनी कार में
तो कूड़ा बाहर उड़ रहा है
पर्यावरण के लिए
अफ़सोस चल रहा है
अपने घर का कचरा
सड़कों, गलियों, नदियों 
में निकल रहा है
और बताओ क्या चल रहा है?
दुर्घटना में मर जाए कोई
तो आन्दोलन चल रहा है
और चालान बड़ा तो
गुस्सा आ रहा है
अपनी गलतियाँ
किसी को दिखती नहीं
दूसरों की कमियों का
बखान चल रहा है
और बताओ क्या चल रहा है?
विज्ञापन के नाम पर
बच्चों व युवाओं की सेहत से
खिलवाड़ चल रहा है
न्यूज़ के नाम पर
मन-मुटाव चल रहा
फ़ायदा हो तो सलाम
नहीं तो इंतक़ाम चल रहा है
धूल चहरे पर है
और आईना धुल रहा है
बस भई! यही सब कुछ चल रहा है!!

हिमालय की गोद में

हिमालय की गोद में